ग्वार के बारे में सामान्य जानकारीग्वार बीज से ग्वार गम उत्पादन की संक्षिप्त प्रक्रियाग्वार गम के विभिन्न उपयोग

ग्वार के बारे में सामान्य जानकारी


ग्वार एक प्राचीन व बहु-उद्देशीय दलहनी फसल है जो कि मुख्य रूप से शुष्क व अर्ध शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है। ग्वार के बीज से गम प्राप्त होता है जिसका उपयोग अनेक प्रकार के उद्योगो में किया जाता है। भारत व पाकिस्तान में ग्वार की खेती के लिये आदर्श जलवायु परिस्थितियाँ हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिका, दक्षिण अफ्रिका, जांबिया, सूडान, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, मलावी व जायरे आदि देशों में भी इसकी खेती की जाती है।

ग्वार के उत्पादन में भारत विश्व में अग्रणी है जो वैश्विक उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। भारत में पारम्परिक रूप से ग्वार की खेती मुख्यतः राजस्थान, हरियाणा, गुजरात व पंजाब में की जाती है। भारत के अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक व महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी ग्वार की खेती की जाती है। ये राज्य मुख्य रूप से सब्जी हेतु ग्वार की खेती करते हैं, लेकिन बाजार भाव अच्छे हों तो इन कम ज्ञात ग्वार क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग के लिये ग्वार के बीज की आपूर्ति करने की विशाल क्षमता है। राजस्थान भारत का अग्रणी ग्वार उत्पादक प्रदेश है। अनिश्चित मानसून, कम वर्षा, कम सापेक्ष अर्द्रता, तेज धूप व हवा गति, यहॉ की जलवायु की विशेषताएँ हैं।

गाय के चारे के रूप में ग्वार का उपयोग बहुत प्राचीनकाल से होता आ रहा है। सबसे पहले ग्रन्थ ऋगवेद में भी ग्वार का उल्लेख मिलता है। ग्वार के बीज के एण्डोस्पर्म से यौगिक गम (गोंद) प्राप्त किया जाता है और यही वह गुण है जिसने ग्वार को विश्व में मान्यता प्रदान की है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय संकट की परिस्थितियों में जब कागज निर्माण में काम आने वाले स्टार्च के स्थान पर किसी दूसरे पदार्थ की आवश्यकता को महसूस किया गया, तभी से ग्वार गम का उपयोग उद्योगों में बढ़ने लगा।

औद्योगिक गम (गोंद), पशुओं के चारे एवं बढ़ती जनसंख्या की प्रोटीन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये, ग्वार को अब एक व्यावसायिक नकदी फसल के रूप में जाना जाता है। ग्वार से प्राप्त प्रोटीन से मानव के भोजन में प्रोटीन की कमी कुछ हद तक दूर हो सकती है।

ग्वार बीज से ग्वार गम उत्पादन की संक्षिप्त प्रक्रिया


ग्वार से ग्वार गम पाऊडर प्राप्त करने के लिए पहले ग्वार बीज को दो हिस्सों में तोड़ा जाता है। यह एक यांत्रिक प्रक्रिया है जिसमें ग्वार बीज को चक्की में चला कर विभिन्न चलनी से गुजारते हैं जिससे एण्डोस्पर्म से अंकुर भाग पृथक हो जाता है। इस प्रकार प्राप्त एण्डोस्पर्म को ग्वार दाल या छाला कहते हैं । इस ग्वार दाल पर लगे छाले (बीज कवच) को नरम करने हेतु सेका जाता है तथा इसे नुकीली सतह पर रगड़ द्वारा चमकाया जाता है, जिससे एकदम साफ एण्डोस्पर्म यानि रिफाईण्ड स्प्लिट प्राप्त होती है। ग्वार बीज से रिफाईण्ड स्प्लिट प्राप्त करने की प्रकिया में बीज के बाहरी कवच से चूरी (ग्वार चूरी) व अंकुर भाग से कोरमा (ग्वार कोरमा) भी प्राप्त होता है जिन्हें ग्वार आहार (ग्वार मील) कहा जाता है। इस प्रकार प्राप्त रिफाईण्ड स्प्लिट से विभिन्न प्रसंसकरण तकनीकों द्वारा उपयोगकर्ता की आवश्यकता के अनुसार विशिष्ट गुणवत्ता के ग्वार गम पाऊडर का उत्पादन किया जाता है।

ग्वार गम के विभिन्न उपयोग


ग्वार गम एक कारगर एवं बहुत जगह प्रयुक्त होने वाला जैव-पालिमर है जिसका विभिन्न औद्योगिक एवं खाद्य के उत्पादों में निम्नलिखित तरह से प्रयोग किया  जाता है ।

  • शीतलित भोजन : आइसक्रीम, पेय पदार्थ, शीतलीत केक में यह रवा वृद्धि में नियन्त्रण, आर्द्रता की कमी को रोकना, हिमकृत ज्वलन को कम करना, पिघलन को रोकना, हिमांक बिन्दु को नियन्त्रित एवं पृथक करने का कार्य करता है ।
  • मांस उत्पाद : ग्वार गम विभिन्न तरह के मांस उत्पाद जैसे सॉसेज के उत्पादन में चिकनाई एवं संयोजक के रूप में काम करता है । ग्वार गम शीतजल घुलनशीलता एवं जलायोजन के अतिरिक्त जल का आसानी से अवशोषण एवं संयोजन को अनुमोदित करता है ।
  • बेक्ड्फूड : ब्रेड, केक, पेस्ट्री में यह आर्द्रता ग्रहण कारक के रूप में एवं नमी को बनाये रखने के लिए उपयोग किया जाता है । यह आवश्यक संयोजन एवं सतह की परत को बनाये रखता है ।
  • दुग्ध उत्पाद : योगर्ट, मीठा पकवान, चीज आदि में उपयोग करने पर ग्वार गम इनकी संरचना को उन्नत करता है और रंग समानता एवं स्यानता को बनाये रखता है । यह दुग्ध उत्पाद में मुँह के स्वाद को बढ़ाता है।
  • सॉस एवं अचार : ग्वार गम का प्रयोग सॉस, सलाद, अचार आदि में भी किया जाता है । यह सॉस के मुक्त प्रवाह को बढ़ाता है और पानी एवं तेल के अलगाव को कम करता है ।
  • मीठा पदार्थ : चॉकलेट, जेली, बिस्कुट आदि में ग्वार गम अपने श्यानता के गुण के कारण आर्द्रता नियन्त्रण, जैल निर्माण, अगर एवं जिलेटिन अनुस्थापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
  • पेय पदार्थ : कोको, फल रस, शक्कर रहित एवं मद्य पेय पदार्थ में ग्वार गम श्यानता को नियन्त्रित करता है व मुँह के स्वाद को बढ़ाता है ।
  • पालतू जानवरों के खाद्य : पशु चारा उत्पाद में ग्वार गम एक अच्छा गाढ़ा स्थायित्व वाला कारक है। यह जैल बनाता है और भोजन में आर्द्रता को बनाये रखता है ।
  • सौन्दर्य प्रसाधन : क्रीम, लोशन, बालों के शैम्पू एवं कडिशनर में ग्वार गम चिकनाई, फिल्म आदि बनाने वाले कारक के रूप में कार्य करता है ।
  • पेस्ट एवं क्रीम : दंत मंजन, शेविंग क्रीम आदि में इसका उपयोग किया जाता है l उच्च श्यानता के कारण यह पेस्ट को बिना दबाव के बाहर निकालने में मदद करता है ।
  • खनन : ग्वार गम का खनन उद्योग में भी उपयोग होता है । तैरने वाला कारक अथवा स्थिर करने का कारक के रूप में झाग को स्थिर करता है व जल वापसी में सहायक होता है ।
  • तम्बाकू : ग्वार गम का प्रयोग तम्बाकू के खण्डों के संयोजक के रूप में किया जाता है ।
  • तेल के कुएँ एवं विस्फोटक क्षेत्र में : ग्वार गम अपने बहु-आयामी गुण जैसे जल कमी का नियन्त्रण, श्यानता नियन्त्रण, घर्षण में कमी व ड्रिल बिट्स को ठंडा करने के कारण तेल के कुएँ खोदने में इसका प्रयोग होता है ।
  • औषधि : विटामिन, सीरप आदि में भी ग्वार गम का प्रयोग किया जाता है l
  • भोजनीय रेशा : आंशिक रूप से हाइड्रोलाइज्ड ग्वार गम एक प्राकृतिक, जल में घुलनशील भोज्य रेशा है । ग्वार गोंद के नियन्त्रित आंशिक एन्जाइम हाइड्रोलाइसिस द्वारा आंशिक रूप से हाइड्रोलाइज्ड ग्वार गम उत्पन्न होता है । अर्धजटिल खाद्य के अध्ययन से एवं उत्परिवर्तन जांच से इसकी सुरक्षा को सुनिश्चित किया गया है । विश्व भर में भोजन के गुण को उन्न करना इसके निश्चित रसायन एवं भौतिक गुण के कारण सम्भव हो सका है । यह ग्वार गम जल में घुलनशील है जो रेचक की तरह कार्य करता है । यह आंत्रीय गति को नियन्त्रित करता है और कब्ज से निजात दिलाता है ।
  • अन्य उपयोग : ग्वार गम का उपरोक्त उपयोग के अलावा अन्य उत्पादों यथा- फोटोग्राफी, जल संशोधन, अगरबत्ती, नूडल्स, नवरत्नों, कृत्रिम रॉल, जल आधारित पेन्ट, बैट्री, पॉलिश, प्रिन्टिंग इंक आदि में भी प्रयोग किया जाता है ।